"समुराई बनने के लिए केवल बलवान होना काफी नहीं है। मन लगाकर पढ़ना भी जरूरी है।" उसकी माँ हमेशा यही कहती थी। इसलिए शरीर को साधने के साथ-साथ किंतारो ने पढ़ाई में भी मन लगाना शुरू किया।
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इस तरह जब वह बड़ा हुआ, तो किंतारो पहाड़ छोड़कर राजधानी की ओर चल पड़ा।
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इस तरह जब वह बड़ा हुआ, तो किंतारो पहाड़ छोड़कर राजधानी की ओर चल पड़ा।