भिक्षु ने उसकी मदद करने का निश्चय किया और उसका हाथ पकड़ लिया। बूढ़ी औरत रास्ता दिखाते हुए कहती रही, "उधर! उधर!" पगडंडी पहाड़ के भीतर और गहराई तक जाती गई।
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आखिर वे पहाड़ में बने एक घर तक पहुँचे। बूढ़ी औरत ने कहा, "धन्यवाद। पर अब अँधेरा होने वाला है, और रात में रास्ता खतरनाक है। आज रात यहीं रुक जाओ।" अधिक विकल्प न होने के कारण भिक्षु ने बात मान ली।
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